संजय डुबरी; टायगर, भालू और भावकी बझार ..!
संजय डुबरी; टायगर, भालू और भावकी बझार ..! “जंगल एक खुली किताब है, इसे कहीं से भी पढ़िए, इसकी ना कोई शुरुआत है, ना कोई अंत। आप जीवन के किसी भी मोड़ पर इसका कोई भी पन्ना खोलिए, अगर आप में कुछ जानने की चाहत है, तो आप इसे चाहे कितनी भी देर, और किसी भी इरादे से क्यों ना पढ़ें, इसमें आपकी रुची हमेंशा बनी रहेगी, क्यों कि प्रकृती अनंत है।.”― जिम कॉर्बेट “में जब भी जंगल से लौटता हूँ तो खुद को ज्यादा खुश इन्सान पाता हूँ” … मैं -- https://www.instagram.com/p/DXw99Pdk0U1/?igsh=MTR2eG92cDVqcWl0NA== जंगल का राजा!! संजय दुबरी (मप्र) राष्ट्रीय उद्यान के विस्तीर्ण जंगलो में बाघ खोजना घास में सुई खोजने की तरह है। लेकिन आसमान में सूरज कहर ढ़ा रहा है, तो यह जरूर गरमी से बचके के लिए पानी की तलाश में होगा। तालाब के आस-पास दूसरे किसी जानवर का ना होना, संकेत है कि वह आस—पास ही है। अब संयम और प्रतीक्षा का खेल शुरु हो जाता है, वह छांव में आराम से बैठा हुआ है और आप चिलचिलाती धूप में उसकी राह देख रहे हो, पारा 44 डिग्री तक चला गया है। और आज आपका नसीब ज़ोरों पर है, दूसरी ओर से ज...